स्लॉग ओवर्स का पहला ‘छक्का’ है सवर्ण आरक्षण, अभी और बड़े ऐलान करेंगे PM मोदी!

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2019 के लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने सामान्य श्रेणी के आर्थिक पिछड़े लोगों को 10 फीसदी आरक्षण देने का बड़ा फैसला लिया है. कार्यकाल के आखिरी दिनों में लिए गए इस ऐतिहासिक फैसले को सीधे तौर पर चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है. इसका समर्थन करने वाले विपक्षी दलों ने भी इसे लोकसभा चुनाव में वोट जुटाने वाला बताया है. इस बीच सरकार ने भी माना है कि आतिशी पारी मैच के अंतिम ओवर्स में ही खेली जाती है. ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि क्या नरेंद्र मोदी 2019 से पहले कुछ और गेमचेंजर कदम उठाने वाले हैं.

राज्यसभा में आरक्षण बिल पर चर्चा के दौरान केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी इस तरह के संकेत दिए हैं. उन्होंने कहा है कि क्रिकेट में छक्का स्लॉग ओवर्स में ही लगता है और यह पहला नहीं है, अभी और भी छक्के लगेंगे. अब सवाल ये है कि आखिर मोदी के पिटारे में अभी क्या बाकी है, जो उनकी पारी को मजबूत स्थिति में ला सकता है.

मिडिल क्लास को सस्ता होम लोन-मोदी सरकार का अंतिम बजट अगले महीने आने वाला है. माना जा रहा है कि इस बजट में सरकार मध्य वर्ग के लिए कुछ बड़े ऐलान कर सकती है. इनमें सबसे बड़ा कदम मिडिल क्लास को आसानी से घर उपलब्ध कराना है. बताया जा रहा है कि होम लोन पर सरकार राहत दे सकती है. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने सभी को घर देने का वादा किया था और मोदी 2022 तक सभी को पक्के घर देने का वादा सार्वजनिक मंचों से करते रहे हैं, ऐसे में अपने इस बड़े वादे को पूरा करने के लिए सरकार होम लोन के रेट कम कर सकती है ताकि मिडिल क्लास के लोग आसानी से घर पा सकें.

किसानों के खाते में पैसे-किसानों की कर्जमाफी चुनावी जीत का फॉर्मूला बन गई है. बीजेपी ने 2017 में यूपी में ये दांव चला था, जिसके बाद से पंजाब, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस ने इसे आजमाया और गुजरात को छोड़कर सभी राज्यों में उसे पूरी सफलता मिली. अब कर्जमाफी की काट के लिए मोदी सरकार भी किसानों को राहत के नए विकल्प पर विचार कर रही है. माना जा रहा है कि कम कीमतों पर फसल बेचने वाले किसानों को नुकसान की भरपाई के लिए सरकार एक निर्धारित रकम देने की स्कीम ला सकती है.

दूसरी तरफ सरकारी सूत्रों से यह जानकारी भी सामने आई है कि सरकार उन किसानों से कृषि कर्ज पर ब्याज लेना बंद कर सकती है जो समय पर अपनी किस्त अदा कर देते हैं. इसके अलावा एक और विचार भी चर्चा में है, जिसके तहत किसानों को सरकार खेती के लिए हर सीजन में चार हजार रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से मदद दे सकती है और यह पैसा सीधे किसानों के खाते में जाएगा.

इनकम टैक्स में छूट- बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार टैक्स को लेकर भी बड़ा फैसला ले सकती है. इसके तहत इनकम टैक्स छूट की सीमा को ढाई लाख से बढ़ाकर तीन लाख रुपये तक किया जा सकता है.

जीएसटी में हो सकते हैं बदलाव-जीएसटी को कांग्रेस ने बड़ा चुनावी मुद्दा बनाया है. राहुल गांधी इसे गब्बर सिंह टैक्स कहते रहे हैं. मोदी सरकार भी जीएसटी लागू करने के बाद से कई बार इसमें बदलाव कर चुकी है. टैक्स रेट भी बदले जा चुके हैं. अभी भी जीएसटी को लेकर कारोबारी में असमंजस की स्थिति मानी जाती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को आगरा में दिए अपने भाषण में भी इसके संकेत दिए. उन्होंने कहा कि जीएसटी को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है, जबकि इसके लगने से छुपे हुए टैक्स खत्म हो गए हैं. पीएम मोदी ने कहा कि 99 फीसदी चीजों को 18% से कम रेट में लाया गया है और सरकार जीएसटी को और आसान करने की प्रक्रिया पर काम कर रही है.

बता दें कि गुरुवार (10 जनवरी) को ही जीएसटी काउंसिल की मीटिंग होने जा रही है. कैट ने सुझाव दिया है कि जीएसटी को केवल तीन स्तर पर ही लगाया जाए. ऐसे में माना जा रहा है कि इस मीटिंग में सरकार कुछ बड़े फैसले भी ले सकती है.

यानी गरीब सवर्णों को आरक्षण देकर एक बड़े तबके को खुश कर चुकी मोदी सरकार अब किसान, मिडिल क्लास, कारोबारी और नौकरीपेशा लोगों के नाम ये बड़े शॉट भी खेल सकती है.

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